Rishton ka tana bana

रिश्तों का ताना बाना

आज एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा उठवा दिया मेरे मन ने,अब क्या करूं इसकी ना सुने तो मानता ही नहीं।तरह तरह के विचार काली आंधी के जैसे आ गए में में। ये रिश्ते आपके जन्म से शुरू होते है,और मृत्यु के बाद भी रहते और आप ही नहीं रहते ,तो इसको समझना है उतना ही कठिन जितनी की Quantum physics। सच्चाई ये है कि विज्ञान के विद्यार्थी तो हम हैं नहीं परन्तु लगाव बहुत रखते है।देखा जाए तो होता भी यही है हमारा दिल वहीं लगा रहता है जहां हम नहीं होते जो हमारा नहीं होता। सुना है कि Quantum theory बहुत कठिन है। आइंस्टाइन को भी समझ नहीं आ रही थी। ये लिखने के बीच में  ख़्याल आया पहले इसको ही समझने की कोशिश करें। रिश्ते तो समझ आ नहीं रहे।
"लॉ वाले या इनलॉ के सभी रिश्ते हुए कठिन गुत्थी इनकी सुलझाने में बीते सारे दिन।"

भौतिक (physics) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द फ्युसिस से हुई जिसका अर्थ है। " प्रकृति " (nature) । भौतिक विज्ञान में अध्ययन किया जाता है। द्रव्य, उर्जा और प्राकृतिक घटनाओं का।रही बात क्वांटम की तो ये क्वांटा का बहुवचन है जो कि किसी भौतिक राशि का सबसे छोटा रूप है। आसान शब्दों में कह सकते है कि ये सिद्धांत कई सिद्धांतों का ग्रुप है  इसमें भी उर्जा और पदार्थ के गुण धर्म की व्याख्या होती है।
ऊपरी अनुच्छेद कुछ को मुश्किल लगा होगा पर अब आसान भी हो जाएगा और रिश्तों से जुड़ा हुआ भी प्रतीत क्योंकी में रिश्तों का ताना बाना इससे जोड़ने वाली हूं जरा धैर्य की आवश्यकता होगी, में विज्ञान की विद्यार्थी ना सही परन्तु फिलासफी(दर्शनशास्र) से मेरा गहरा रिश्ता है ये बी ए में मेरा विषय था,तो बतादुं कि भौतिक विज्ञान का विकास  दर्शन से ही हुआ है।इसमें आत्मा , परमात्मा के बारे में जाना जाता है। क्वांटम जो भौतिकी में सबसे छोटी राशि है वो प्राप्त होती है। ठोस, द्रव एवं गैस के विघटन के सबसे आखिरी स्तर पे ,और इसमें कुछ भी नहीं होता, ना ठोस ,ना द्रव ना ही गैस, तो अब बात पकड़ में आई कि इसमें होता है सिर्फ vaccum(शून्य,निर्वात)।जो स्पेस में है यानी कुछ नहीं ,अर्थात हम कुछ नहीं है  ;)
       
मिल गया प्रूफ मै नहीं कह रही ये भारतीय फिलोस्फर कणाद जी कह गए बहुत पहले।फिर यही निष्कर्ष निकाला कि जो सब कुछ है वो ईश्वर ,भगवान ,अल्लाह है।इस्लाम में बताया गया है अल्लाह सब जगह है,हिन्दू धर्म के अनुसार ईश्वर सर्वव्यापी है ।वो परमात्मा है हमारी आत्मा उसी का अंश हैं। हम सब एक ही हैं जैसे की इस्लाम में बताया गया अल्लाह ने हमारे अंदर खुद रूह डाली तभी हम जिंदा है जब ये निकल जाएगी तो हम कुछ भी नहीं रहेंगे। अंततः साबित होता है कि क्वांटम फिजिक्स का जो क्वांटा है जो कुछ भी ना होकर सिर्फ एक उर्जा है उसका संबंध ब्रह्माण्ड और ईश्वर से है।ये मेरे अपने विचार नहीं वैज्ञानिक इसकी लगातार खोज में जुटे हैं।
अब मेरे लेख में जो रिश्तों के ताना बाना है वो कुछ है ही नहीं । और हम सब एक हैं।
धर्म की द्रष्टि में हम भगवान जुड़े हुए है और समाज में हम तरह तरह के रिश्तों से बंधे है। पर एक होते हुए भी रिश्तों मे बहुत प्यार, मुहब्बत के बावजूद खटास है,मतभेद कलह है।
     रिश्तों में रिक्तता है!
कभी लगता है ये रिश्ते  स्वार्थ के है, कभी बड़े प्यारे लगते है। तो उन्हीं प्यारो से हम झगड़ते है और उनके बिना रह भी नहीं पाते।वही हां वही शक्ती हमें बांधे हुए है ।सच में जो काम ग्रैविटी करती है वही बल हमारे रिश्तों में भी अप्लाई होता है।कहने को कभी रिश्ते टूट भी जाते है पर फिर भी दिल से जुड़े रह जाते हैं ।बहुत पहले एक कहानी पढ़ी थी मनुष्य "एक द्वीप नहीं"  हम अकेले नहीं रह सकते।हमें एक दूसरे साथ भी चाहिए।
जिस तरह विज्ञान और धर्म हमारे बहुत से प्रश्नों के उत्तर देते है और कई प्रश्न अनसुलझे ही रहते है। उसि तरह में भी इस प्रश्न के उत्तर देने में असमर्थ हूं कि इतने प्यारे रिश्तों में मनमुटाव क्यूं आता है। आप भी कोशिश कीजिए,कोई विचार बताइए।
मै तो बस एक सुझाव देती हूं संत रहीम दास जी के शब्दों में
          रूठे सूजन मनाइए,ज्यों रूठे सौ बार
          रहिमन पुनी पुनी पोहिये, टूटे मुक्ताहार।।


Comments

Popular posts from this blog

Aatmnirbharta ka sukh

Sab kuch nahi le jaega

Mera pahla pyar