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Showing posts from April, 2020

Sab kuch nahi le jaega

                              कोरोना सब कुछ नहीं ले जाएगा! बहुत कुछ तो ले लिया इसने बल्कि बहुत से भी बहुत अधिक , कितनो की जान माल , बाजार , नौकरी , अर्थव्यवस्था तक ले ली | लेख के लिखित जाने तक विश्व की death   टोल 1 लाख 70 हज़ार और संदिग्ध व्यक्ति 6 ​​लाख से अधिक , चारों ओर मच रहे इस हाहकार से ऐसा प्रतीत हो रहा है की मानो हम किसी हालीवुड फिल्म मे आ गए हैं | समझ आ गया की प्रकृति के साथ खिलवाड़ बहुत किया हमने , तालाबंदी मे अब तो घरेलू हिंसा की हेल्पलाइन कॉल भी दुगनी हो गई | पूर्ण मानव जाति अवसाद , चिंता , निराशा , से घिर गई है पिछले दो महीने से , पर अब बस हिम्मत चाहिए होगी हमे जो कि कठिन है क्योंकि वो कहा गया है ना - जीत निश्चित हो तो अर्जुन कोई भी बन सकता है , जब मृत्यु निश्चित हो तब अभिमन्यु बनने के लिए साहस चाहिए | ऐसे मे खुशी की खबर ये है कि R 0 (आर नाट  , आर ज़ीरो) एक गणितीय शब्द जो एपिडेमियोलॉजी मे इस्तेमाल किया जाता है , बता रहा है कि संक्रमण अब कम हो गया है | इन परेश...

Bol den agar kursiyan

               बोल दें अगर कुर्सियां! हाँ एक बार सोच के देखिए | क्या कुछ संभव नहीं इस धरती पे , मान लीजिए अगर ये सच न भी हो सके तो फिर कुछ नहीं | फिर हमारी सोच का संसार तो सपने से भी अधिक विशाल है मेरी नज़र मे अगर कुर्सियों को बोलने का मौक़ा मिल जाए बेचारी बोलने से पहले सिसक उठेंगी येका करुण क्रंदन सत्ता के गलियारे से गुजरने पे आपको स्पष्ट रूप सुनाई देगी | अगर नहीं तो बाए हाथ से बाया कान बंद करके   दाहिने हाथ को दाहिने कान के पीछे लगा कर गर्दन को ज़रा तिरछा कर सुनने की कोशिश आप जनाब ये कोशिश करें कि छात्र के जैसे नवाि होना चाहिए जो अध्यापक द्वारा कक्षा मे अरुचिकर पाठ के समय की जाती है। बल्कि उस बहू के समान हो जो सास - ननंदों के बीच हो रही अपनी बुराई को सुनने के लिए की जाती है और सुनकर घंटों   कुढ़ती जलती है | केवल आप सुनने मे समर्थकों की सत्ता की कुरसियां ​​ऐसा तीव्र विलाप करती हैं जिससे पाशाण हृदय भी द्रवित हो जाए | दिन रात   अपने पे विराजमान देश को दीमक की तरह चाटने वाले भ्रष्ट नेताओं को जी भर के कोसती हैं ये |  ...