Noorjahan-Mumtaz
नोट:- लफ्ज़ उलझे हुए, भावनाऐं बहकी हुई, ज़बान अजीब सी हैं। पढ़ के आखिर में आप ये बोलने को गर मजबूर हो गए। क्या बकवास है। तो लिखना सफल । 👍
नूरजहां – मुमताज़ (उर्दू kafka )
उफ़्फ़ अल्लाह , हाए मेरी तौबा ,मेरे परवरदिगार आपकी पनाह चाहती हूँ | ये गुलाबो - सिताबों की जोड़ी अम्मी की खालाएँ , अब्बू की फुफ्फियां , सारे जहां की हमदर्द , सबकी खासमखास रिश्तेदार अपनी दिल अज़ीज़ नातिन के साथ घर में तशरीफ आवरी फरमां चुकी हैं |अब मैं चली ये खुशख़बरी का बम अपिया ज़ूबी के सर पे दाग़ने , यकीनन वो आतिश-फ़िशां की तरह फट पड़ेंगी | ना जाने कितनी देर- कितनी ही देर में वो अपने खिसियाए हुए चेहरे का जुगराफिया सुधार पाएँगी | आज ज़रा उन्होने अपनी दुनिया में आमद- ए- नागेहानी की बर्थड़े पार्टी क्या रख ली तो इस खबर-ए-अव्वल को न जाने किस नासपिटे, मरगिल्ले एक पर वाले काले कबूतर ने इन्हें दे दी |
वैसे तो किसी भी शादी ब्याह, मेहंदी, उबटन,ईद,बकरीद, जलसा, फातिहा, चालीसवाँ में इनका आना, जी भर के खाना, हर काम में बढ़-चढ़ के शामिल रहना अव्वलीन फर्ज़ था| मगर आज का प्रोग्राम कुछ स्पेशल था अब्बू हुज़ूर से छिपा के महफिल-ए-ख़ास सजाई थी| अब्बू की ख़ास जासूस 007दादी जान भी दो दिन के लिए गुलबदन फुफ्फ़ी लच्छन वाली के घर गईं थीं जब ही तो हम ये कारनामा परवान चढ़ा पाई थीं जो अधूरा ही अंजाम पे रुख रवां था| मासूम अम्मी जान को कितनी-कितनी ही हील हवाले देकर मनाया ,
"सभी तो मनाते हैं, अम्मी एक बार मान जाएँ ना, प्लीज़ ! सिर्फ स्मोकीटिक्का बिरयानी और फ़ाल्ट लाइन केक दो ही आइटम बना दें"|
अब तो पूरा प्लान ही धुआँ हुआ जाता है| चार नाज़ों से पाली दोशीज़ा सहेलियों को बुलाया था| उनके हंसी के गुलगुलों की गूंज बाहर के बड़े से भौंडे,मुंह फाड़े बरामदे में नगाड़े जैसे बज रही थी|
“अरे अल्लाह अपिया इन रूप की रानियों महारानियों को तो खामोश करा लो, खलाएँ अंदर आया ही चाहती हैं, जल्दी जाओ, जाते जाते ये वक़्त बे वक़्त एक पट खोल के आँखमारने को बेताब दरवाजे जी को भी भेड़ती जाना, नहीं तो आपकी नाजनीनों की अर्श शिगाफ़ क़व्वालियाँ अहले खानदान में नशर कर देंगी| गा-गा के एलान होगा कि शहर के पेश-ए-इमाम मौलाना कादरी की बेटियाँ बर्थड़े पार्टी का शौक़ पूरा फरमा रही हैं| क़सम खुदा की अपिया जल्दी करो”|
“चुप कर जाओ बेवक़ूफ़! तुम क्या जल्दी करो-जल्दी करो उस निखट्टू नोमान के सुखट्टे तोते की तरह रटने लगी हो| मुझे इनका डर नहीं है| असली डर तो अब्बू साहब के शहनशाही जलाल वाले गौस-ए-ग़ज़ब ग़ुस्से का है| बिना एक लम्हे की देर किए वो दीन ईमान की लंबी फेहरिस्त वाली कोई ना कोई हदीस का हवाला सुनाने लग जाएंगे| फिर होगी दिन भर की सारी नमाज़ों की पूछ-गछ | कितनी पढ़ीं कितनी छोड़ीं , कितनी अल्लाह ने कुबूल की कितनी आसमान से अपना मुंह पीट के वापस चली आईं ”|
और फिर... सामने की लंबी साँप नुमा गैलरी के कमजोर महीन जालियों वाले खुले हुए चूँ -चूँ चर्राते दरवाज़े का ज़ालिम पर्दा हटा, नूरजहां-मुमताज़ अंदर दाखि़ल हुईं। चाशनी सी मीठी आवाज़ की शहनाई का सुर लगा के फरमाईं,
“ए जुबी, नौशा समान तो अंदर रखने में मदद करो हमारी| हम तो अल्लाह बख्शे आर्तग़ुल की कुरान ख्वानी में जा रहे थे| ये क़ादरी हमे ज़बरदस्ती ही अपने साथ घसीट लाए ना जाने कौन खुशी मे| अब रिक्शे वाले से फसाद बरपा किए हुए हैं | ए बौराए शक्लों वलियों तुमपे कौन सी मनहूसी क़ब्रिस्तानी स्याही पुत गई , बड़ी बड़ी गोल आंखें बाहर ही गिराने का इरादा है हमें घूर-घूर के। भाड़ जैसा मुंह करो किस बेहया मच्छर की मुंतज़िर हो”|
“क्या अब्बू ? चंगेज़ फुफ्फा का चौथा निबटा के रायबरेली से आज ही वापस आ गए "।
दोनों दिल पकड़ के सितम-ज़रीफा हो के घुनी हुई लकड़ी वाले बाबा आदम के ज़माने से एक ईंट के पैर वाले तख्त पे धम्म.... से धँसती चली गईं |
kya khub likha h👍🏻
ReplyDeleteKhub Lakhnavi andaz 👌👌👌😍😍
ReplyDeleteUrdu wali hindi yahi to Lucknow ki shan hai
DeleteAye mui aa dhamkin. . . Sari birthday party ka nahusiyat kr diya. Allah hi samjhega
ReplyDeleteAre abbu lae the unko
Delete😝
Aye mui aa dhamkin. . . Sari birthday party ka nahusiyat kr diya. Allah hi samjhega
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