Yaden


खुश रहो तुम संगीता ! 

    मधुरध्वनियों या स्वरों का कुछ खास नियमों और विशिष्ट लय मे होने वाला प्रस्फुटन कहलाता है संगीत ये पूरी मानव जाति को भगवान द्वारा प्रदत उपहार है। फिर चाहे कृष्ण की बंसी से निकले या मस्जिद की आज़ान से, होता बहुत कर्णप्रिय है।  
और ऐसी ही तुम हो अपने नाम के अनुरुप | बहुत ही मधुर …..
डिंग डौंग ......1
डिंग डौंग ......2
डिंग डौंग ......3
              ग्यारह बज गए लो आ राबिया डोर-बेल बजाने| चारों आ गईं बाहर अपने गांधीनगर के फ्लैट के कॉमन एरिया मे लग गई बातें करने |
राबिया -क्यूँ रेनु भाभी भैया ऑफिस गए ?
रेनु – और तुम घर मे ही रखखे हो न ?
वंदना -ओह आज भैया को फिर माइग्रेन हुआ ,रुको मैं तुम्हें एक होम रेमेडी भेजती हम मैं ने कल ही फकेबुक पे देखी है |तीनों बात कर रही थी मगर उनमे से एक थी मध्यम कद,तीखे नैन नक्श की मुझे बहुत भली लगने वाली संगीता ,ये क्या बोलती है ज़रा सुने ध्यान से |
संगीता -गुड मॉर्निंग ,मैं अभी पापा का टिफ़िन बना रही हूँ ,फिर मम्मी का नाश्ता , बर्तन धोने हैं :बाद मे आती हूँ बाय |
लो मैं हो गई उदास ,रेनु अभी भी वंदना की बातों को ध्यान पूर्वक सुन रही थी पर मेरा मन तो संगीता के पीछे ही चला गया |कैसी है ये लड़की? हर समय व्यस्त
                     कैसे बदलूँ मैं फितरत अपनी
                     तुझे सोचते रहने की आदत हो गई है|
उसको और जानने के लिए मैंने एक googlite की तरह पहला काम यह किया की उसका नाम गूगल किया जो जानकारी मिली देख के मैं तो स्तब्ध रह गई |कुम्भ राशि वाली प्रतिभावान ,बुद्धिमान ,हृदय से दयालु| मेरा कभी राशिफल से इतना लगाव नहीं था परंतु उसके व्यवहार की जिस विशेषता का मेल हुआ वो ये की इस राशि के लोगों मे परिश्रम करने की सामर्थ्य अधिक होती है| साधारण ज्वर आदि मे तो बिना दवाई  लिए सारे काम करती रहती जिसमे हम सब लेट जाते हैं| दिवस मे 2 या 3  घंटे आराम करने के सिवा मैंने उसे कभी  खाली नहीं देखा| सर्वाधिक प्रेरित करने वाली उसकी ये बात थी  कि उसके जीवन का लक्ष्य ही माता -पिता की सेवा करना था| अक्सर ही मैं उसे lady shravan kumar के नाम से चिढ़ाती थी|
सिर्फ माता पिता तक ही सीमित नहीं था उसका प्रेम, वो बहुत अच्छी एक बहन , मासी भी थी |मेरी उससे यही शिकायत थी की वो दोस्तों पे ध्यान नहीं देती | मैं यहाँ गलत थी ,वो बोलती कम,दिखावा कम करती लेकिन दोस्ती निभाई उसने सदैव |मेरे लिए रमज़ान में चाहे खमन,गुलाबजामुन या स्वादिष्ट दहि बड़े बनाना हो या वंदना के बीमार होने पे उससे खाना बनाने  का पूछना आ कभी रेनु की बेटी की फरमाइश पूरी करना ,वो कभी पीछे नहीं रहती| यहाँ ये बताना आवश्यक है की उसके हाथ की रसोई सब को पसंद आती|
बोलती तो वो कम पर बिन बोले ही हर लेडीज क्लब, बर्थड़े पार्टी और त्योहारों मे अपनी उपस्थिती दर्ज कराती थी अर्थात सामाजिक भी थी।
सादा जीवन उच्च विचार उसका मूल मंत्र था। स्वभाव और पहनावे मे इतनी सादगी थी की बिल्डिंग मे रहने वाली दूसरी मॉडर्न लड़कियों की तीखी बातों के तोप गोलों के निशाने पे सदैव वो रहती। ऐसा नहीं की उसे कुछ समझ नहीं आता दिल उसका दुखता पर जवाब मे कुछ भी बुरा कहने की उसकी आदत जो नहीं थी। बिना चेहरे पे कोई भाव लाये वो मुस्कुराकर उन्हे देखती रहती। कुछ समय पश्चात अपने काम मे मग्न हो जाती।
बहुत ही अच्छा समय गुज़ारा हमने परंतु परिवर्तन प्रक्रति का नियम है त अब मैं अपने पति के जॉब मे होने वाले ट्रान्सफर के कारण उससे बिछड़कर दूसरे शहर आ गयी।
उससे मिलना इत्तिफ़ाक़ था
और बिछड़ना हमारा नसीब।
और अब जब भी मैं उसके बारे मे सोचती हूँ तो दुआ करती हूँ की अपने माँ बाप की सेवा करने के बदला अपने जीवन मे जो सूनापन जो उसने खरीदा है उसका मूल्य भगवान आप ही चुका सकते हैं। शादी न करने और जीवन भर माँ बाप की सेवा करने का उसका लिया गया निर्णय सही था या ग़लत पर वो निभा जी जान से रही है। इस कलयुग मे बेटा हो या बेटी कोई इतने आदर से ये कर्म कर नहीं पाता तो ऐ ऊपरवाले आप उसकी झोली मे अपार खुशियाँ डालना क्यूंकी आपके खजाने मे कोई कमी नही है। मुझे कुछ कुछ लिखने का शौक है इसलिए आज का टोपिक तुम्हें बना लिया आशा करती हूँ तुम्हें बुरा न लगे। मैं सोचती हु ऐसा व्यक्तित्व सदा ही सराहे जाने योग्य है।
इंसान तो घर घर मे जन्म लेते हैं
पर इंसानियत कहीं कहीं ...........।

Comments

  1. वाह ऐसी भी होती है लड़कियाँ प्रेरणास्पद।

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