Sharab achchi hai
शराब अच्छी है !
जी जनाब,बचपन से सुनते आए हैं सर्फ एक्सेल वाली आंटी कहती हैं दाग़ अच्छे हैं, दाग़ अच्छे हैं। तो फिर शराब क्यूं नहीं।अपनी आंखों से देख लिया अब तो मानने में कोई दिक्कत नहीं, लाकडाउन ३ मे सबसे पहले essentials की दुकान खुलनी थी, सो खुल गई शराब की दुकान और लग गई लाइन किलोमीटर किलोमीटर की। आप जरा भी द्वेष भाव मन में ना लाए कृपया। डाक्टर और पुलिस की तरह इनको भी सम्मानित किया जाना चाहिए। ये हैं देश के economy warriors.आपको नहीं पता इनकी भावनाओं का।
"लुत्फ़-ए- मय तुझ से मैं क्या कहूं जाहिद।
हाय ! कमबख्त तू ने पी ही नहीं " ।
और पापुलारिटी अंदाजा इससे लगाइए कि अब तो कितने माडर्न रेसिपी मे भी इसने जगह ले ली है। कोई रेसिपी सर्च करो तो किसी में वाइन डली है किसी मे रम डालनी होगी। मैंने अपनी बहन जो ज़रा खाद्य ज्ञानी है से उपाय पूछा तो जवाब मिला बजिया तुम सिरका डाल दो उसे भी तो सडा़ के बनाया जाता है। हुंह सड़ तो चुकी है इनकी मानसिकता। पीने की चीज है तो पी लो भई खाने में डाल कर कन्फ्यूज तो ना करें।
एम्स और एनडीडीटीसी ने 2018 में अपने सर्वेक्षण से पता लगाया कि देश में 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते है। एक बात पे हंसी आई मुझे कि भारत में सबसे ज्यादा शराब पीने वालों की संख्या छत्तीसगढ़ में है लेकिन पी सबसे अधिक उत्तरप्रदेश में जाती है।और बदनामी का दाग़ दिल्ली के सर। वर्तमान स्थिति के हिसाब से देखिए दो बात महत्वपूर्ण है एक तो सब लोग कितने उदास, परेशान, चिंतितहैं,पीने के बाद आराम की अवस्था होगी,अगर गुस्से में घरवालों पे अत्याचार हुआ भी तो दाग करोना के सर से सरक जाएगा,सब कहेंगे अरे जरा ज्यादा हो गई इनकी। दूसरी बात सरकार कितनी परेशान है। अर्थ-व्यवस्था की कमर टूट गई है, सरकार को कल्याण कारी कार्य भी करने होते हैं जैसे सड़क,पुल बनवाना उन सब कार्यों को राजस्व (revenue)से करती हैं जो सरकार को taxes से प्राप्त होता है आबकारीविभाग(ExciseDepartment) के आंकड़ों बताते हैं कि ज्यादातर राज्यों को उनके राजस्व का 15 से 20 फीसदी शराब से ही आता है और साथ आती हैं सैकड़ों बीमारियां । WHO का दावा है कि दुनिया भर में होने वाली हर तरह की मौत में 20 में से एक 1शराब के कारण होती है।
सारी जिम्मेदारी आप सरकार के सर नही ओढ़ा सकते क्योंकि भारत में कई राज्यों में शराब पूरी तरह बैन है। मेरा राज्य गुजरात भी इसकी श्रेणी में आता है कथित dry state.भले ही अर्थ-व्यवस्था की पटरी पे ना आए पर अन्य राज्य भी पूर्ण शराब बंदी लागू करना चाहते हैं, फिर शुरू हो जाती है तस्करी और गैर कानूनी जहरीली शराब का कारोबार।फिर भी मेरा प्रश्न है जिस प्रकार दहेज लेना अपराध है तो क्या उसके लिए कोई लाइसेंस नहीं बनता कि जो दहेज लेना चाहे सरकारी तौर पर ले सके।मतलब सिर्फ सवाल है। कल दिल्ली सरकार ने 70 फीसदी tax badhaya, करोना फीस भी लगाई पर अफसोस लगने वाली लंबी लाइन छोटी ना करा सकी।
"मयकदे में किसने कितनी पी खुदा जाने।
मयकदा तो मेरी बस्ती के कितने घर पी गया।"
मेरे घर के पास की बस्ती की गरीब लड़की को जब मैने घर काम के लिए रखा तो पड़ोस के लोगों ने बताया कि इसकी मां नही है और पिता एवं चाचा मर्डर केस में जेल गए और बूढ़ी दादी शराब बनातीं है। जब मैने अपनी मां से यूंही जिक्र किया तो वो बोली बेचारी पेट पालने के लिए करती हैं। तो मैंने मन ही मन सोचा कितनों के घर बर्बाद करने वाली शराब पेट भी पाल सकती है मैने तस्वीर के दोनो रुख आपके सामने रखने की कोशिश की अब फैसला आपका क्योंकि पैसा है आपका।
एक खास बात तो रह गई कि हमारा भारत देश जिसकी 37 फीसदी जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे है वहां 2 लाख करोड़ रुपए की सालाना शराब गटक ली जाती है।
बडे बड़े परिवार मिटे यों कोई ना हो रोने वाला।
हो जाएं सुनसान महल वो जहां थिरकती सुरबाला।
राज्य उलट जाएं, भूपो की भाग्य सुलक्षमी सो जाए।
जमे रहेंगे पीने वाले,जगा करेंगी मधुशाला।
हरिवंशराय बच्चन
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