Tareef : karke dekhie
तारीफ : करके देखिए
हाँ ! अच्छा लगता है | सच में | तारीफ का अपना एक गणित है , एक विज्ञान है , मनोविज्ञान भी है | सामाजिक पहचान है और तो और लंबा इतिहास है | पता है तारीफ करना एक कला है | सारे विषय से तो रिश्ता जोड़ दिया मैंने मगर कम्प्युटर विषय से क्या ताल्लुक है नहीं जानते हां दिन रात कंप्यूटर पे व्यतीत करने वालों से रिश्ता गहरा है |
जाएका -ए -तारीफ बड़ा खुशनुमा है ।सबको अपनी तारीफ बड़ी भाती है -
" शायर को खुश करती है तारीफ ए शेर ,
सौ बोतलों का नशा है इस वाह वाह में "
मगर बात जब दूसरों की तारीफ की आती है तो रुपये मे बारह आने लोग भांजी मार जाते है | क्योंकि उनकी psychology कुछ इस प्रकार की है -
"इतनी तारीफ न किया करो रूह कंपकपा जाती है मियां |
सुना है जो अल्लाह को प्यारे हो जाते हैं अच्छे वही होते हैं "
वास्तव मे आचार्य राम चन्द्र शुक्ल जी के अनुसार समाज मे निंदा , ईर्ष्या के ही भाव प्रचलित हैं |मानव मन मस्तिष्क के चारों कोनो मे जंगली झाड़ियों की तरह यही पनपती फलती फूलती हैं | कुछ तकिया कलाम भी उर्फ ए आम हैं जैसे - ज़्यादा तारीफ करने से लोग ऐंठ जाते हैं , बड़ा जाते हैं , खुद को तीसमार खाँ समझने लगते हैं | कई परस्थिथियों मे कुछ % ये सही ठहरा भी होगा लेकिन उसी जगह जब स्वयं को रख के देखते हैं तो कितनी खुशी , कितना उत्साह , कितना मनोबल बढ़ता है जब आपके लिए कोई तरीफ़ी कलेमात बोले | जैसे -
बिरयानी तो आजकल सभी बनाते खिलाते हैं मगर जब एक भाई ने हमें कहा
" वाह क्या बिरयानी बनती हैं आप बिलकुल फाइव स्टार होटल जैसी "
ना कभी इतने बड़े होटल गए ना खाया हमने |अब बस खुश हो लेने दो हमको , कोई मेहमान आता है पहले ही बता देते हैं हम फाइव स्टार वाली बिरयानी बनाते है confidence overloaded , चाहे उस दिन चिकन कच्चा रह जाए , चावल गल के चिपक जाए हमसे क्या मतलब ? मेहमान जाने उसका काम जाने |
इस प्रकार ज्ञात हुआ की ये तो फॉर्मूला है प्रयोग के वास्ते, लोग खुश हो जाते हैं भई | जोक भी प्रचलित है पत्नी जी की तारीफ करते रहा करो जी जीवन की गाड़ी मे स्पीड बनी रहती है |
ये तारीफ सीधी सच्ची होनी चाहिए शर्तें लागू * वरना चापलूसी से मेल होते देर नहीं लगती |मानव मन के भाव हैं भई कोई सीमा रेखा नहीं है क्रास न ही करें तो अच्छा | किरकिरी हो जाती है लोगों की होशियारी का मानदंड दूसरों को जज करते समय नेक्सट लेवेल पे आ जाता है |
तारीफ का मुद्दा उठाने के पीछे महत्वपूर्ण कारण यह है कि तारीफ से तार जुडते हैं संबंध मजबूत होते हैं | पुराने जमाने मे बच्चों को सुधारने में डंडे का ही अधिक योगदान रहता था जिसे सिरे ख़ारिज किया जा चुका है
बहुत से माता -पिता आज भी इस बात के समर्थक हैं कि हमे भी जम के पीटा गया था तो हम सुधर गए थे अब हम भी पीटेंगे , लेकिन समझ लीजिए इन तिलों मे तेल नहीं है |
वर्तमान समय मे तो वार्तालाप ...... वार्तालाप......बातचीत से हल | विदेशों मे तो अभिन्न अंग का दर्जा प्राप्त है | संबंध सुधार मे we need to talk या फिर just talk ही उचित है |इस बातचीत की प्रक्रिया मे शुरुआत में ही दूसरे को बताना होता है कि " आप मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं , मैं आपके साथ रिश्ता जारी रखना चाहती हूँ |फिर किन्हीं प्रशंसात्मक वाक्यों द्वारा वार्तालाप को आगे बढ़ाया जाता है |
तारीफ एक दैवीय शब्द है अर्थात अल्लाह, ईश्वर को भी हम तारीफ से मनाते हैं |
अलहमदुलिल्लाह ( सब तारीफ अल्लाह के लिए हैं ) जब हम कहते हैं तो हम उसे खुश कर रहे होते हैं | इतनी बड़ी हस्ती के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द यकीनन छोटा नहीं dynamite है प्रयोग करके तो देखिए |
कहीं प्रयोग करे न करें आपकी मर्ज़ी मगर मेरी विनती है दिल ओ जान से प्यारे दुलारे अपने बच्चों पे एवं बिगड़े हुए ऑफिस के माहौल पे प्रयोग ज़रूर करें |हां हो सकता है बच्चे कभी ज़िद कर जाते हैं या फिर ऑफिस मे भी कुछ बिफरे हुए लोग होते हैं मगर उनकी संख्या और अवधि छोटी होती है |हो सकता उनपे ये फॉर्मूला काम न करे अतिरिक्त पे तो भारी है |
लेखक के अनुसार - मनुष्य तो क्या पशु भी प्रेम की भाषा समझते है
मनोचिकित्सक के अनुसार - दिमाग का वो हिस्सा जो भावनाओं को समझता है उसमें तारीफ के समय ऐसा रसायन स्रावित होता है जो कार्य करने कि शक्ति को मजबूती एवं अच्छी प्रेरणा को बढ़ाने वाला होता है |
आंकड़ों की माने तो हमारे 45% युवा अवसाद में घिरें हैं बहुत बोझ हैं उनके नाज़ुक कंधों पे | पहले पढ़ाई का बोझ , फिर नौकरी ढूँढने का बोझ अंत समय मे अकेले पन का बोझ | तो इतनी बोझिल जिंदगी मे दो मीठे बोल , कोई उत्साहवर्धक शब्द कानों मे रस घोले तो वो सफलता में मजबूत सीढ़ी का कार्य करते हैं |
यहाँ मैं आपको तारीफ के संबंध मे एक महत्वपूर्ण बात बताना चाहती हूँ कि दो प्रकार के व्यवहार की तारीफ समान्यता की जाती है -
पहला - मान लिया कि आप किसी से कहते हैं ,
" आप बहुत अच्छे पेंटर हैं " तो ये हुई उसके टैलेंट की तारीफ जो कि god gift है इसमे उसपे अधिक प्रभाव पड़ने की संभावना नगण्य है जैसे कि वो पलट के जवाब मे अपनी शान खुद ही मार सकता है -
"तारीफ के मोहताज नहीं होते हैं कुछ लोग जो खुद फूल हों उनपे इत्र नहीं छिड़का जाता |
दूसरा - आप यदि कहते हैं -
" आप जो इतनी मेहनत करते हैं उसके कारण ही इतनी अच्छी पेंटिंग बन के तैयार होती है "
यहाँ सुधार की बहुत गुंजाइश रहती है | अब वो व्यक्ति , बच्चा अधिक कोशिश से अगला कार्य संपादित करेगा |जिसका फल प्राप्त हो जाएगा और हमारा मतलब भी पूरा अगला खुश भी रहेगा | रिसर्च के अनुसार इस प्रकार दी जाने वाली प्रेरणा से चिंता , तनाव में काफी गिरावट देखी गई है |
यहाँ मैं indutrial psychology की तरफ चली गई हूँ जहां बॉस सकारात्मक व्यवहार रख के employee से दुगना कार्य करवा सकता है जबकि गुस्सा या रौब दिखा कर सिर्फ माहौल खराब ही हाथ आता है |
अमेरिका के प्रधानमंत्री अब्राहम लिंकन लिखते हैं -
मेरी सेकरेटरी ऑफिस मे सुबह आई तो मैं ने उनसे कहा आज आपने अच्छे कपड़े पहने हैं , आपका दिन शुभ हो , ज़रा ये फ़ाइल आज पूरी कर दीजिएगा |वो खुशी खुशी काम करने चली गईं जबकि वो काम आज पूरा होना मुश्किल था फिर भी उन्होने किया हाँ मैंने उनकी सच्ची तारीफ की थी झूठ नहीं |
अंत मे एक ज्ञान की बात आप सबकी तारीफ कीजिए उससे आपको खुद ही को खुशी मिलेगी कि अपने किसी को एक पल के लिए ही सही खुश तो किया मगर बदले मे कोई आपकी तारीफ नहीं करता तो आप उसका कुछ नहीं कर सकते |आप स्वयं आनंदित रहिए कबीर दास जी के शब्दों मे -
" जिसमे जितनी बुद्धि है तितनो देय बताय ,
वाकों बुरा न मानियो और कहाँ से लाए "
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