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Dr. Dave

दिल के नहीं मगर दिल से सच्चे डॉक्टर की कहानी।                              डॉक्टर दवे एक छोटे से शहर में थोड़ी पुरानी बिल्डिंग में था अमेरिका में पढ़ कर काफी जीवन बिताकर लौटे अधेड़ उम्र के मालिक डॉक्टर  दवे का क्लीनिक। शहर में बच्चों के ख़ास और अच्छे डॉक्टर होने के साथ-साथ कई दूसरी विशेषता भी थी जिसके लिए वह जाने जाते थे। इन्हीं से अब वास्ता पढ़ने वाला था राकेश और उजाला दंपति का जो अपने 5 वर्ष के बेटे कृष के बार बार बीमार पड़ जाने को लेकर परेशान थे। क्लीनिक के बाहर टंगा बोर्ड :               सुबह का समय- 6:00 बजे से केवल 5 लोग               शाम का समय - 4:00 बजे से केवल 5 लोग               इमरजेंसी के  समय परेशान ना करें कहीं      ...

Mera pahla pyar

                       मेरा पहला प्यार  हिन्दी मेरी मुहब्बत है , फ़ख़्र  है , एतमाद है।  एक हिंदुस्तानी होने के नाते जन्म लेने के बाद जो पहला बोल  मेरे मुंह से फूटा होगा उसमें शक नहीं कि वह हिन्दी का ना हो। हिंदी हमारी मातृभाषा है ।                 मात्र एक भाषा नहीं है। 50 करोड़ के आसपास लोग हिन्दी भाषा को बोलते हैं। यह हमारी राष्ट्रभाषा है। मगर ऐसा नहीं कि पूरे भारत में यह बोली जाती है। बल्कि भाषा के संबंध में तो कहावत है कि- भारत में  " कोस कोस पर पानी बदले , चार कोस पर बानी " इतने बड़े भूभाग के हम स्वामी है। सब भारतवासियों की अलग अलग अंचल की अपनी भाषा है , घर की , प्यार की सब अलग है ।हम उत्तरी भारत के हैं तो हमारा रिश्ता अधिक गहरा है। कल हिन्दी दिवस था मेरी बहन ने मुझसे सवाल किया , अरे हिन्दी से दोस्ती ! ( प्यार से मुझे बुलाती है) आपने कुछ लिखा नहीं। मैंने कहा हां.... क्योंकि मैं पढ़ने में व्यस्त थी । पढ़ना मस्तिष्क का आहार है। पढ़ना लिखना जीवन है। सांस लेना (...

Tareef : karke dekhie

       तारीफ : करके देखिए  हाँ ! अच्छा लगता है | सच में | तारीफ का अपना एक गणित है , एक विज्ञान है , मनोविज्ञान भी है | सामाजिक पहचान है और तो और लंबा इतिहास है | पता है तारीफ करना एक कला है | सारे विषय से तो रिश्ता जोड़ दिया मैंने मगर कम्प्युटर विषय से क्या ताल्लुक है नहीं जानते हां दिन रात कंप्यूटर पे व्यतीत करने वालों से रिश्ता गहरा है | जाएका -ए -तारीफ बड़ा खुशनुमा है ।सबको अपनी तारीफ बड़ी भाती है - " शायर को खुश करती है तारीफ ए शेर , सौ बोतलों का नशा है इस वाह वाह में "  मगर  बात जब दूसरों की तारीफ की आती है तो रुपये मे बारह आने लोग भांजी मार जाते है | क्योंकि उनकी psychology कुछ इस प्रकार की है -   "इतनी तारीफ न किया करो रूह कंपकपा जाती है मियां | सुना है जो अल्लाह को प्यारे हो जाते हैं अच्छे वही होते हैं " वास्तव मे आचार्य राम चन्द्र शुक्ल जी के अनुसार समाज मे निंदा , ईर्ष्या के ही भाव प्रचलित हैं |मानव मन मस्तिष्क के चारों कोनो मे जंगली झाड़ियों की तरह यही पनपती फलती फूलती हैं | कुछ तकिया कलाम भी उर्फ ए आम हैं जैसे - ज़्यादा तारीफ ...

Qeemat Azadi ki

         क़ीमत आज़ादी की लखनऊ 1942 (कालेज के सालाना जलसे से अपनी बग्घी में लौटते हुए। मिर्ज़ा सरफराज़ रिज़वी और उनके दोस्त महेश शंकर विद्यार्थी ) सरफराज़ रिज़वी - ये लखनऊ की हसीन सरजमीं वल्लाह...     ये गोमती का किनारा...     वाह है ! जन्नत का नज़ारा... महेश -  सही कहा, तुम्हारा इश्क़ देख कर तो मैं भी हैरत में पड़ जाता हूं। इंटरमीडिएट की डिग्री तो मिल  गई आगे क्या इरादा है ? सरफराज़ रिज़वी -  अब्बू साहब वकालत पढ़ने के लिए बाहर भेजने की ज़िद पकड़ कर बैठे हैं। महेश -   अच्छा...  हां...तुमने जो आज़ादी के लिए "अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का "लेख कालेज की मैगज़ीन के लिए लिखा था। उसकी तो बहुत वाह वाही हो रही है। लो नवाब साहब तुम्हारी तो कोठी आ गई। सरफराज़ -   आह.....छोड़ो भी कहां की नवाबी ? मिर्ज़ा सआदत रिज़वी की कोठी खंडहर बता रहे हैं कि .... इमारत बुलंद थी... गोमती नदी के ठीक किनारे पर आगे पीछे शानदार बागों के साथ एक वक्त में नवाब वाजिद अली शाह ने बड़े शौक़ से अपनी बेटी ज़ेबुन्निसा के लिए बनवाई थ...

Paralysis

                           पैरालिसिस कहीं ईमान बिक जाते हैं,कहीं फरमान बिक जाते हैं        लगा के देखो तो बोली यहाँ इंसान बिक जाते है । " अब कोई खतरे की बात नहीं , she is fine " डॉ की धीमी आती आवाज़ पे कोमल ने तेज़ दर्द से चुभती आँखों को खोलने की कोशिश की ,पास बैठी माँ उसके ठंडे पड़ते माथे पे हाथ रख कर हौले से सहलाते हुए बोली , " तुम अच्छी हो गई मेरी बच्ची हम घर चलेंगे "। घर .... हाँ घर ...... में तो पापा ....... वो सफ़ेद कफन मे लिपटे मेरे पापा....उनके पास तो वही खड़ा था उनका बॉस मुकेश | " माँ वो मुकेश क्यूँ आया था ? बताओ वो पापा से क्यूँ मिलने...." आह ! मेरी आंखे  रही हैं " कोमल की गुस्से से तेज़ होती आवाज़ धीमी पड़ गई | माँ , " तुम सो जाओ बेटा ,आज तीन दिन के बाद होश आया है छुट्टी मिलने वाली है हॉस्पिटल से हम घर चल के बात करेंगे " सोते ही कोमल के मानसपटल पे अपने चिंतित पिता का चित्र उभरने लगा .... ...........................

I can't breathe

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I can't breathe  😭 प्रस्तुत टर्म की शुरुआत अमेरिका के हाल ही मे हुए अश्वेत आंदोलन से हुई जब एक श्वेत पुलिस कर्मी ने अश्वेत जार्ज फ्लाएड नामी व्यक्ति का सिर अपने पैरों से कुचल दिया और वह अपनी जान की भीख मांगता रहा , " मैं सांस नहीं ले पा  रहा, प्लीज़ रहम करो !" बहुत ही निंदनीय घटना इस पे जितना रोष जताया जाए कम ही रहेगा|         अकसर जीवन में कुछ ऐसे पल आ ही जाते हैं| जो दम घोंटू होते हैं| खैर दम तो इस समय सबका घुंट रहा है, भूख से भी, सड़क पे भी ,घर बैठ के भी,किचन मे खाना बना के भी| और खास बात यह है कि आपदा को अवसर मे बदलने को भी तैयार बैठे हैं लोग यहाँ तो। इस कोरोना काल में कितनों का रोजगार छिन गया, तो कइयों का चमक भी गया| किसी का घर जले कोई तापे| करे भी क्यूँ ना, "सच्चा पूंजीपति होता भी वही है जो फांसी के समय भी आपको रस्सी बेच दे "|  गरीब भूख से बिलखते रहे, हम खाना बना बना के बर्तन माँजते रहे| दर्द स्त्रियों का भी कोई समझता नहीं, समझ से याद आया जो विश्व के सबसे समझदार देश ठहरे उन्होने भी क्या फोड़ लिया कोरोना केस भी वहाँ कम नहीं...

Noorjahan-Mumtaz

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नोट:- लफ्ज़ उलझे हुए, भावनाऐं बहकी हुई, ज़बान अजीब सी हैं। पढ़ के आखिर में आप ये बोलने को गर मजबूर हो गए। क्या बकवास है। तो लिखना सफल । 👍 नूरजहां – मुमताज़ (उर्दू kafka ) उफ़्फ़ अल्लाह , हाए मेरी तौबा ,मेरे परवरदिगार आपकी पनाह चाहती हूँ | ये गुलाबो - सिताबों की जोड़ी अम्मी  की खालाएँ , अब्बू की फुफ्फियां , सारे जहां की हमदर्द , सबकी खासमखास रिश्तेदार अपनी दिल अज़ीज़ नातिन के साथ घर में तशरीफ आवरी फरमां चुकी हैं |अब मैं चली ये खुशख़बरी का बम अपिया ज़ूबी के सर पे दाग़ने , यकीनन वो आतिश-फ़िशां की तरह फट पड़ेंगी | ना जाने कितनी देर- कितनी ही देर में वो अपने खिसियाए हुए चेहरे का जुगराफिया सुधार पाएँगी | आज ज़रा उन्होने अपनी दुनिया में आमद- ए- नागेहानी की बर्थड़े पार्टी क्या रख ली तो इस खबर-ए-अव्वल को न जाने किस नासपिटे, मरगिल्ले एक पर वाले काले कबूतर ने इन्हें दे दी |              वैसे तो किसी भी शादी ब्याह, मेहंदी, उबटन,ईद,बकरीद, जलसा, फातिहा, चालीसवाँ में इनका आना, जी भर के खाना, हर काम में बढ़-चढ़ के शामिल रहना अव...