Padhna kyun chod dia
Disclaimer- यह ब्लॉग ऐसा कोई दावा नहीं करता कि इसे पढ़कर आप को किसी आनन्द की अनुभूति होगी, यहां खुलेआम आपको पोक किया जा रहा है। जिससे आप को बहुत खिसियाहट, क्रोध आने की संभावना है यदि आप इसे खुले दिल से स्वीकारे तो यह ईद का एक तोहफा है, और तोहफ़े कीमत नहीं देने वाले की नीयत देखी जाती है। पढ़ना क्यूं छोड़ दिया ? "हैरत है! तालीम और तरक्की में है पीछे। जिस क़ौम का आगाज़ 'इक़रा' से हुआ था।" आप सब इतने काबिल है कि मुझे इसका अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं फिर भी कहती हूं जब पैग़म्बर मुहम्मद (सअव)को नबूवत मिली, फरिश्ते जिबरील (अस) उनके पास अल्लाह की किताब कुरान की पहली आयत(verse)लाए और बोले- "इक़रा बिसमी रब्बेक़ल्लज़ी ख़ल़क़"। अर्थात- पढ़ो ऐ नबी अपने रब के नाम से जिसने कायनात बनाई। तो पढ़ना इतना महत्वपूर्ण है कि सबसे पहले ही पढ़ने की बात की जा रही है। Census of India के आंकड़ें तो कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं भारत की सक्षरता दर- पुरुष- 75.3%, स्त्री- 53.7% वैसे तो पढ़ाई का धर्म से कोई लेना देना नहीं है फिर भी यहां सिर्फ प्रकाश डालने की गर्ज से प्रस्तुत कर रही हूं ...