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Padhna kyun chod dia

Disclaimer- यह ब्लॉग ऐसा कोई दावा नहीं करता कि इसे पढ़कर आप को किसी आनन्द की अनुभूति होगी, यहां खुलेआम आपको पोक किया जा रहा है। जिससे आप को बहुत खिसियाहट, क्रोध आने की संभावना है यदि आप इसे खुले दिल से स्वीकारे तो यह ईद का एक तोहफा है, और तोहफ़े कीमत नहीं देने वाले की नीयत देखी जाती है।  पढ़ना क्यूं छोड़ दिया ? "हैरत है! तालीम और तरक्की में है पीछे। जिस क़ौम का आगाज़ 'इक़रा' से हुआ था।" आप सब इतने काबिल है कि मुझे इसका अर्थ बताने की आवश्यकता नहीं फिर भी कहती हूं जब पैग़म्बर मुहम्मद (सअव)को नबूवत मिली, फरिश्ते जिबरील (अस) उनके पास अल्लाह की किताब कुरान की पहली आयत(verse)लाए और बोले- "इक़रा बिसमी रब्बेक़ल्लज़ी ख़ल़क़"। अर्थात- पढ़ो ऐ नबी अपने रब के नाम से जिसने कायनात बनाई। तो पढ़ना इतना महत्वपूर्ण है कि सबसे पहले ही पढ़ने की बात की जा रही है। Census of India के आंकड़ें तो कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं भारत की सक्षरता दर- पुरुष- 75.3%, स्त्री- 53.7% वैसे तो  पढ़ाई का धर्म से कोई लेना देना नहीं है फिर भी यहां सिर्फ प्रकाश डालने की गर्ज से प्रस्तुत कर रही हूं ...

Sharab achchi hai

शराब अच्छी है ! जी जनाब,बचपन से सुनते आए हैं सर्फ एक्सेल वाली आंटी कहती हैं दाग़ अच्छे हैं, दाग़ अच्छे हैं। तो फिर शराब क्यूं नहीं।अपनी आंखों से देख लिया अब तो मानने में कोई दिक्कत नहीं, लाकडाउन ३ मे सबसे पहले essentials की दुकान खुलनी थी, सो खुल गई शराब की दुकान और लग गई लाइन किलोमीटर किलोमीटर की। आप जरा भी द्वेष भाव मन में ना लाए कृपया। डाक्टर और पुलिस की तरह इनको भी सम्मानित किया जाना चाहिए। ये हैं देश के economy warriors.आपको नहीं पता इनकी भावनाओं का। "लुत्फ़-ए- मय तुझ से मैं क्या कहूं जाहिद। हाय ! कमबख्त तू ने पी ही नहीं " ‌। और पापुलारिटी अंदाजा इससे लगाइए कि अब तो कितने माडर्न रेसिपी मे भी इसने जगह ले ली है। कोई रेसिपी सर्च करो तो किसी में वाइन डली है किसी मे रम डालनी होगी। मैंने अपनी बहन जो ज़रा खाद्य ज्ञानी है से उपाय पूछा तो जवाब मिला बजिया तुम सिरका डाल दो उसे भी तो सडा़ के बनाया जाता है। हुंह सड़ तो चुकी है इनकी मानसिकता। पीने की चीज है तो पी लो भई खाने में डाल कर कन्फ्यूज तो ना करें। एम्स और एनडीडीटीसी ने 2018 में अपने सर्वेक्षण से पता लगाया कि ...

Sab kuch nahi le jaega

                              कोरोना सब कुछ नहीं ले जाएगा! बहुत कुछ तो ले लिया इसने बल्कि बहुत से भी बहुत अधिक , कितनो की जान माल , बाजार , नौकरी , अर्थव्यवस्था तक ले ली | लेख के लिखित जाने तक विश्व की death   टोल 1 लाख 70 हज़ार और संदिग्ध व्यक्ति 6 ​​लाख से अधिक , चारों ओर मच रहे इस हाहकार से ऐसा प्रतीत हो रहा है की मानो हम किसी हालीवुड फिल्म मे आ गए हैं | समझ आ गया की प्रकृति के साथ खिलवाड़ बहुत किया हमने , तालाबंदी मे अब तो घरेलू हिंसा की हेल्पलाइन कॉल भी दुगनी हो गई | पूर्ण मानव जाति अवसाद , चिंता , निराशा , से घिर गई है पिछले दो महीने से , पर अब बस हिम्मत चाहिए होगी हमे जो कि कठिन है क्योंकि वो कहा गया है ना - जीत निश्चित हो तो अर्जुन कोई भी बन सकता है , जब मृत्यु निश्चित हो तब अभिमन्यु बनने के लिए साहस चाहिए | ऐसे मे खुशी की खबर ये है कि R 0 (आर नाट  , आर ज़ीरो) एक गणितीय शब्द जो एपिडेमियोलॉजी मे इस्तेमाल किया जाता है , बता रहा है कि संक्रमण अब कम हो गया है | इन परेश...

Bol den agar kursiyan

               बोल दें अगर कुर्सियां! हाँ एक बार सोच के देखिए | क्या कुछ संभव नहीं इस धरती पे , मान लीजिए अगर ये सच न भी हो सके तो फिर कुछ नहीं | फिर हमारी सोच का संसार तो सपने से भी अधिक विशाल है मेरी नज़र मे अगर कुर्सियों को बोलने का मौक़ा मिल जाए बेचारी बोलने से पहले सिसक उठेंगी येका करुण क्रंदन सत्ता के गलियारे से गुजरने पे आपको स्पष्ट रूप सुनाई देगी | अगर नहीं तो बाए हाथ से बाया कान बंद करके   दाहिने हाथ को दाहिने कान के पीछे लगा कर गर्दन को ज़रा तिरछा कर सुनने की कोशिश आप जनाब ये कोशिश करें कि छात्र के जैसे नवाि होना चाहिए जो अध्यापक द्वारा कक्षा मे अरुचिकर पाठ के समय की जाती है। बल्कि उस बहू के समान हो जो सास - ननंदों के बीच हो रही अपनी बुराई को सुनने के लिए की जाती है और सुनकर घंटों   कुढ़ती जलती है | केवल आप सुनने मे समर्थकों की सत्ता की कुरसियां ​​ऐसा तीव्र विलाप करती हैं जिससे पाशाण हृदय भी द्रवित हो जाए | दिन रात   अपने पे विराजमान देश को दीमक की तरह चाटने वाले भ्रष्ट नेताओं को जी भर के कोसती हैं ये |  ...

Rishton ka tana bana

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रिश्तों का ताना बाना आज एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा उठवा दिया मेरे मन ने,अब क्या करूं इसकी ना सुने तो मानता ही नहीं।तरह तरह के विचार काली आंधी के जैसे आ गए में में। ये रिश्ते आपके जन्म से शुरू होते है,और मृत्यु के बाद भी रहते और आप ही नहीं रहते ,तो इसको समझना है उतना ही कठिन जितनी की Quantum physics। सच्चाई ये है कि विज्ञान के विद्यार्थी तो हम हैं नहीं परन्तु लगाव बहुत रखते है।देखा जाए तो होता भी यही है हमारा दिल वहीं लगा रहता है जहां हम नहीं होते जो हमारा नहीं होता। सुना है कि Quantum theory बहुत कठिन है। आइंस्टाइन को भी समझ नहीं आ रही थी। ये लिखने के बीच में  ख़्याल आया पहले इसको ही समझने की कोशिश करें। रिश्ते तो समझ आ नहीं रहे। "लॉ वाले या इनलॉ के सभी रिश्ते हुए कठिन गुत्थी इनकी सुलझाने में बीते सारे दिन।" भौतिक (physics) शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द फ्युसिस से हुई जिसका अर्थ है। " प्रकृति " (nature) । भौतिक विज्ञान में अध्ययन किया जाता है। द्रव्य, उर्जा और प्राकृतिक घटनाओं का।रही बात क्वांटम की तो ये क्वांटा का बहुवच...

Yaden

खुश रहो तुम संगीता !       मधुरध्वनियों या स्वरों का कुछ खास नियमों और विशिष्ट लय मे होने वाला प्रस्फुटन कहलाता है संगीत ये पूरी मानव जाति को भगवान द्वारा प्रदत उपहार है। फिर चाहे कृष्ण की बंसी से निकले या मस्जिद की आज़ान से , होता बहुत कर्णप्रिय है।   और ऐसी ही तुम हो अपने नाम के अनुरुप | बहुत ही मधुर ….. डिंग डौंग ......1 डिंग डौंग ......2 डिंग डौंग ......3               ग्यारह बज गए लो आ राबिया डोर-बेल बजाने | चारों आ गईं बाहर अपने गांधीनगर के फ्लैट के कॉमन एरिया मे लग गई बातें करने | राबिया -क्यूँ रेनु भाभी भैया ऑफिस गए ? रेनु – और तुम घर मे ही रखखे हो न ? वंदना -ओह आज भैया को फिर माइग्रेन हुआ , रुको मैं तुम्हें एक होम रेमेडी भेजती हम मैं ने कल ही फकेबुक पे देखी है | तीनों बात कर रही थी मगर उनमे से एक थी मध्यम कद , तीखे नैन नक्श की मुझे बहुत भली लगने वाली संगीता , ये क्या बोलती है ज़रा सुने ध्यान से | संगीता -गुड मॉर्निंग , मैं अभी पापा का टिफ़िन बना रही हूँ , फिर मम्मी क...

Whatsapp se niklo

बात तब की है……. जब…             जब सबके पास व्हाट्सेप की सुविधा नहीं थी , क्योंकी ये एप ही नहीं था ना जी, और तो और मेरी बहनों,भाभियों , ननदों के पास तो जी फोन ही नहीं था । पर मैं इस मामले में धनी थी क्योंकी मेरे पति परमेश्वर जी ठहरे tech-savvy।उनके पास electronic gadgetsकी भरमार थी तो बारिश की बूंदों के कुछ अंश हमारे उपर भी गिर जाते। वह वाह!            तो  भाई बात जहां तक social networking की है तो बेचारी उन लोगों को तो पता ही नहीं कि  orkut कब आया और कब चला भी गया मै हा मै जानती हूं कहा ना मेरे पास सुविधा थी। अब धन्य हो मुकेश अंबानी जी कि रिलायंस आया ,सबके हाथ फोन आया, जिओ नेटवर्क आया तो मच गई धूम । फ़िर रंक से राजा की कहावत को चरितार्थ किया श्री jan kaum ne वही अपने वॉट्सएप के फाउंडर,पहले एकदम गरीब थे रोजगार कहीं मिल नहीं रहा था,अब बन गए है मलिक ९८० करोड़ डॉलर के। हाल ये है हर घर घर फोन , वीडियो कॉलिंग, चैटिंग, स्टेटस लगाने की धूम मची हुई है, भा...